संस्मरण - यादों के झरोखे से
संस्मरण - No Comments » - Posted on November, 22 at 5:38 am
-डा. यासमीन सुलताना नकवी, जापान
महादेवी जी की शिष्याओं की सीमा रेखा केवल भारत तक ही नहीं थी। उनके यहां नेपाल और श्रीलंका से भी छात्रएं पढ़ने आती थीं। 1975 से 1978 तक बी.ए. और एम.ए. में महादेवी जी से पढ़ने का मुझे भी सौभाग्य प्राप्त हुआ था।
यादें तो ‘बदली’ हैं जो विभिन्न रंगों की होती [...]
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