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लेख - हिन्दी के ये सम्मेलन, ये उत्सव

लेख - No Comments » - Posted on November, 22 at 6:42 am

-डा. सत्येन्द्र श्रीवास्तव, यू.के.
मुझे चालीस वर्षों से हिन्दी भाषा और साहित्य को पढ़ाते हुए जो एक बात बेहद अखरती रही, वो ये कि हिन्दी के हितैषी भारतीय, गोरी चमड़ी वाले प्राध्यापकों के प्रति अतिरिक्त भक्तिभाव का प्रदर्शन करते हैं। यह बिल्कुल भी जरूरी चीज न थी और न है।
अभी कुछ दिन हुए मुझे हिन्दी साहित्य [...]

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लेख - डायसपोरा में हिन्दी साहित्य-रचना

लेख - No Comments » - Posted on November, 22 at 6:34 am

-सुषम बेदी, यू.एस.ए.
बात यह है कि विदेशी भारतीयों को रचनात्मक कर्म के लिये नयी भावभूमि तो सहज ही हासिल हो गयी है पर उसकी अभिव्यक्ति का कलात्मक पक्ष अभी भी कमजोर है। जब तक इस दिशा में न केवल नयी भावभूमियों की तलाश, बल्कि उस तलाश के साथ अभिव्यंजना के नये दरवाजे न खोले जायें, [...]

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लेख - शोषण के लिए प्रस्तुत लेखक

लेख - No Comments » - Posted on November, 22 at 6:30 am

-डा. गौतम सचदेव, यू.के.
पैसे देकर छपने वाले लेखक एक ओर प्रकाशकों को अधिकाधिक शोषक बना रहे हैं, तो दूसरी ओर स्वयं अपना अवमूल्यन करवा रहे हैं। उधर प्रकाशक और लेखक के सामने पाठक बेबस हैं, जिन्हें अच्छे साहित्य के स्थान पर अधिकतर बेकार की चीजें पढ़ने को मिल रही हैं।
प्रकाशकों द्वारा लेखकों का शोषण किये [...]

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लेख - विश्व हिन्दी सचिवालय का सफरनामा

लेख - No Comments » - Posted on November, 22 at 6:21 am

-इन्द्रदेव भोला इन्द्रनाथ, मारीशसविश्व हिन्दी सचिवालय का शिलान्यास हुए अब सात वर्ष बीत चुके हैं। पर अब भी हम इसी प्रतीक्षा में हैं कि विश्व सचिवालय के भवन का निर्माण कब होगा।
सन् 1975 हिन्दी जगत का ऐतिहासिक वर्ष था। इसी वर्ष में भारत के शहर नागपुर में प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया गया [...]

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लेख - एक निरंतरता का सवाल है बाबा

लेख - No Comments » - Posted on November, 22 at 6:12 am

-प्रेम जनमेजय, भारतयदि हम ध्यान से अवलोकन करें तो क्या जिन देशों में हमने अत्यधिक सक्रिय सम्मेलन किए हैं, वहां क्या कोई सक्रियता बना पाए हैं? मेरे पास तो त्रिनिडाड का अनुभव है। उस देश में एक विश्व हिंदी सम्मेलन और दो अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन हो चुके हैं और हिंदी की स्थिति यह है कि [...]

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लेख - आठवें विश्व हिंदी सम्मेलन का महत्व

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-विजय कुमार मल्होत्रा, भारतअमरीका का न्यूयार्क शहर वास्तविक अर्थों में बहु-सांस्कृतिक समाज का प्रतिनिधित्व करता है। यह विभिन्न भाषा-भाषियों के बीच अनोखे समन्वय वाला शहर है। यहां इस आयोजन से हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी जिसका प्रभाव न सिर्फ अमरीका के अन्य भागों में, बल्कि विश्व भर में परिलक्षित होगा।
कोई भी सम्मेलन सफल हो या [...]

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