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आपके पत्र

आपके पत्र - - Posted on November, 22 at 6:54 am

नमस्कार,

मुझे एक सप्ताह पूर्व ‘पुरवाई’ का पिछला अंक प्राप्त हुआ। इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। पुरवाई के सारे अंक दिन-प्रतिदिन सार्थक होते जा रहे हैं जो पत्रिका की सफलता का सबसे बड़ा कारण है। बधाई हो आप सब को।
भारत में कहा जाता है कि जब पुरवाई चलती है तो आदमी आलस्य के कारण कुछ नहीं करता। किन्तु इस पुरवाई की बात निराली है। यह पुरवाई जब आप लोगों के बीच से निकल कर इधर-उधर चारों तरफ जाती, चलती-फिरती है तो साहित्यिक वातावरण में एक नई चेतना कौंध जाती है। सोया हुआ मन जाग जाता है। नई-नई गतिविधियों से लोग-बाग परिचित होते हैं। उनके भीतर नई सोच पैदा होती है।
-यासमीन सुलताना नकवी
ओसाका, जापान

माननीय संपादक जी,
पुरवाई में उषा राजे की कहानी ‘वह रात’ पढ़ी। कहानी हर दृष्टि से एक श्रेष्ठ कहानी है। इस कहानी को लेकर रश्मि मित्तल की आलोचना आधारहीन है। लगता है उन्हें कहानी समझ में नहीं आई। कहानी किसी वेश्या की कहानी नहीं है, वह एक मां और बच्चों के बांड (ठवदक) की कहानी है जिसमें ब्रिटिश समाज के नदवितजनदंजम लोगों का चेहरा दिखाया गया है। कहानी का धरातल यथार्थ है।
-पी.डी. माल्हन,
भैकनेल, बर्क

नमस्कार,

मैं ‘पुरवाई’ पत्रिका की नियमित पाठिका हूं। मैंने अक्टूबर-दिसंबर 2006 तथा जनवरी-मार्च 2007 के अंक पढ़े। अक्टूबर-दिसंबर 2006 में प्रकाशित श्रीमती उषा राजे सक्सेना द्वारा रचित ‘वो रात’ कहानी में प्रदर्शित मानवीय संवेदना उल्लेखनीय है। लेकिन अगले अंक में प्रकाशित आपके पत्र विभाग में एक पत्र को पढ़कर मुझे खासी निराशा हुई और मन को बहुत ठेस पहुंची क्योंकि उसमें ‘वो रात’ कहानी की अनावश्यक आलोचना की गई थी।

रश्मि मित्तल के पत्र को पढ़ने के बाद ऐसा ज्ञात हुआ कि वह ब्रिटेन को अच्छी तरह से नहीं जानती हैं। आज ब्रिटेन में कुछ ऐसे-ऐसे लोग भी हैं जिन को पेट भर खाना नहीं मिलता, जिनके पास रोजगार नहीं है और जिन के पास घर नहीं है। ब्रिटेन का यह पहलू दिखाने के लिए किसी को कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं है, जरूरत है तो सिर्पफ आंखें खोलने की और उससे वहां के समाज को देखने की। रश्मि मित्तल ने अपने पत्र में ‘वो रात’ कहानी की जो तीखी आलोचना की है, उससे यह साफ प्रतीत होता है कि वह कहानी में प्रदर्शित मानवीय संवेदनाओं को समझने में असमर्थ रही हैं। ‘वो रात’ कहानी का मूल आधार मां और उसके बच्चों के बीच का प्यार है, वेश्यावृत्ति नहीं। कहानी में किसी भी प्रकार से वेश्यावृत्ति को प्रोतसाहन नहीं दिया गया है। कहानी में बहुत ही खूबसूरती के साथ बच्ची की भावनाओं को दर्शाया गया है और निचले वर्ग के परिवार की मुश्किलों को बहुत ही बारीकी के साथ प्रदर्शित किया गया है।

मैं यह मानती हूं कि मैं एक अच्छे लेखक की तरह लिखने में असमर्थ हूं पर मैं हिन्दी बहुत अच्छी तरह समझ सकती हूं। मैं चाहती हूं कि मेरे पत्र के माध्यम से पुरवाई के पाठकों को कहानी के मूल आधार के बारे में पता चले।
-प्रज्ञा
शैफ्टेसबरी रोड, लंदन

पद्मेश जी
नमस्कार,

पुरवाई का अक्टूबर-दिसंबर अंक मिला। धन्यवाद। वह रात कहानी के लिए उषा जी को ढेरों बधाइयां। शिल्प, कथ्य एवं संप्रेषण, हर स्तर पर कहानी प्रभावित करती है। इस कहानी ने ब्रिटेन के एक कटु सत्य को सामने रखा है।
-सुशील सरित
आगरा, भारत

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